What Is Ramadan? – रमजान क्या है ? #Sehri #IFTAR #TRAVI #Ibaadat

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    zubairkhai
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    What Is Ramadan? – रमजान क्या है ? #Sehri #IFTAR #TRAVI #Ibaadat

    इस्लाम की बुन्याद पांच चीजो पर है |
    1. Kalma
    2. Namaz
    3. Roza
    4. Zakat
    5. Hajj

    जिनमे से एक रोज़ा है। रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रमजान में रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना। कुरान के दूसरे पारे के आयत नंबर 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया।

    क्या है इस पाक महीने का इतिहास ?

    इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक सन् 2 हिजरी में अल्लाह ताला के हुक्म से मुसलमानों पर रोजे फर्ज (जरूरी) किए गए।
    इसी पाक महीने में कुराने पाक नाजिल हुआ। जो इस्लाम की सबसे पाक किताब है। रमजान इस्लामी महीने का नौवां महीना है। इसका नाम भी इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने से बना है। यह महीना इस्लाम के सबसे पाक महीनों में शुमार किया जाता है।

    क्या होती है सहरी,इफ्तार,और तरावी ?

    रमजान के दिनों में लोग तड़के उठकर सहरी करते हैं। सहरी खाने का वक्त सुबह सादिक (सूरज निकलनेसे पहले करीब डेढ़ घंटे पहले का वक्त) होने से पहले का होता है। सहरी खाने के बाद रोजा शुरू हो जाता है। रोजेदार पूरे दिन कुछ भी खा और पी नहीं सकता। शाम कोतय वक्त पर इफ्तार कर रोजा खोला जाता है। एहतियात के तौर पर सूरज डूबने के 3-4 मिनट बाद हीरोजा खोलना चाहिए। फिर रात की इशा की नमाज (करीब 9 बजे) के बाद तरावीह की नमाज अदा की जातीहै। इस दौरान मस्जिदों में कुरान भी पढ़ा जाता है। ये सिलसिला पूरे महीने चलता है। महीने के अंत में 29 का चांद होने पर ईद मनाई जाती है। 29 का चांद नहीं दिखने पर 30 रोजे पूरे कर अगले दिन ईद का जश्नमनाया जाता है।

    क्या है रमजान का असली मकसद ?

    रोजे रखने का मकसद अल्लाह में यकीन को और गहरा करना और इबादत का शौक पैदा करना है।

    #349742
    zubairkhai
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    What Is Ramadan? – रमजान क्या है ? #Sehri #IFTAR #TRAVI #Ibaadat

    इस्लाम की बुन्याद पांच चीजो पर है |
    1. Kalma
    2. Namaz
    3. Roza
    4. Zakat
    5. Hajj

    जिनमे से एक रोज़ा है। रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रमजान में रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना। कुरान के दूसरे पारे के आयत नंबर 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया।

    क्या है इस पाक महीने का इतिहास ?

    इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक सन् 2 हिजरी में अल्लाह ताला के हुक्म से मुसलमानों पर रोजे फर्ज (जरूरी) किए गए।
    इसी पाक महीने में कुराने पाक नाजिल हुआ। जो इस्लाम की सबसे पाक किताब है। रमजान इस्लामी महीने का नौवां महीना है। इसका नाम भी इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने से बना है। यह महीना इस्लाम के सबसे पाक महीनों में शुमार किया जाता है।

    क्या होती है सहरी,इफ्तार,और तरावी ?

    रमजान के दिनों में लोग तड़के उठकर सहरी करते हैं। सहरी खाने का वक्त सुबह सादिक (सूरज निकलनेसे पहले करीब डेढ़ घंटे पहले का वक्त) होने से पहले का होता है। सहरी खाने के बाद रोजा शुरू हो जाता है। रोजेदार पूरे दिन कुछ भी खा और पी नहीं सकता। शाम कोतय वक्त पर इफ्तार कर रोजा खोला जाता है। एहतियात के तौर पर सूरज डूबने के 3-4 मिनट बाद हीरोजा खोलना चाहिए। फिर रात की इशा की नमाज (करीब 9 बजे) के बाद तरावीह की नमाज अदा की जातीहै। इस दौरान मस्जिदों में कुरान भी पढ़ा जाता है। ये सिलसिला पूरे महीने चलता है। महीने के अंत में 29 का चांद होने पर ईद मनाई जाती है। 29 का चांद नहीं दिखने पर 30 रोजे पूरे कर अगले दिन ईद का जश्नमनाया जाता है।

    क्या है रमजान का असली मकसद ?

    रोजे रखने का मकसद अल्लाह में यकीन को और गहरा करना और इबादत का शौक पैदा करना है।

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